Saturday, June 28, 2008

माँ





"माँ"
"गर खुदा कहे किज्न्नत का जलवा है मेरी पनाहों में...


तो मैं कहूँ ,वहाँ भी किसी 'माँ' की हस्ती होगी,नज़ारे कितने भी हो मौसम-ए-दुनिया के रहबर,


हर पहलू मे 'माँ' की कायनात होगी"

6 comments:

Anonymous said...

I truly appreciate it.

Unknown said...

bahut badhiya likhate rahiye.

विनीत उत्पल said...

मजा आ गया

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा.

ghughutibasuti said...

शायद ।
घुघूती बासूती

Anonymous said...

bhut acchi rachana. ma ke bare me likhana hi bhut badi bat hai.