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ढ़पली
...राग अनेक
Thursday, February 21, 2008
चायघर में जश्न
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अनुराग मिश्र
ज़िन्दगी के हर राग को समझने की कोशिश मे लगा हू कानपुर में पला-बढ़ा, पत्रकार बनने की सनक में दिल्ली आ पहुंचा| बहुत दिनों तक भटकने के बाद आखिर एक अखबार ने मेरी कीमत तय कर दी| फ़िलहाल उसी की खा बजा रहा हू|
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